बारिश की वह बूँदें

बारिश की वह बूँदें तब भी वैसी थी ,
बारिश की वह बूँदें आज भी वैसी हैं ,
अगर कुछ बदला तोह वह हम हैं।

उन बूंदों में बिफिकर होकर भीगना ,
उन बूंदों में बेफिकर होकर उछलना ,
उन बूंदों में बेफिकर होकर ज़िन्दगी का आनन्द लेना ,
थी ना हसीन ज़िन्दगी ,
थे ना हसीन पल।

आज ऐसा समां है की उन बूंदों से डरतें हैं ,
आज ऐसा समां है की बूंदों के आते ही भाग जाते हैं,
आज ऐसा समां है की बूंदों के आते ही छिप जाते हैं।
अरे बंधू, जल जाओगे क्या , बारिश की बूंदें हैं ?
भूल गए बचपन के वह पल,
वह पल जब तुम सिर्फ तुम थे।

आज भी समय हैं ,
क्यूँकि
बारिश की वह बूँदें तब भी वैसी थी ,
बारिश की वह बूँदें आज भी वैसी हैं।

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